2026 में ESIC अनुपालन: क्यों 'ग्रॉस पे [Gross pay] ' की जगह अब 'वेतन परिभाषा' ने ले ली है?

साल 2026 में, भारत में पे-रोल अनुपालन (Payroll Compliance) का तरीका पूरी तरह बदल चुका है।

दशकों तक, HR टीमों और व्यापार मालिकों ने कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) देखकर उसकी ESIC पात्रता तय की। लेकिन अब यह तरीका पुराना हो चुका है। जब से ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security), 2020’ पूरी तरह लागू हुई है, तब से वैधानिक मानक ‘ग्रॉस’ [gross] नहीं रह गया है, बल्कि ‘धारा 2(88)’ के तहत वेतन की कानूनी परिभाषा महत्वपूर्ण हो गई है।

एक सीनियर लेबर लॉ कंसल्टेंट के रूप में, मैंने देखा है कि आज अनुपालन में होने वाली सबसे बड़ी गलती समय पर भुगतान न करना नहीं है, बल्कि वेतन की गलत परिभाषा का उपयोग करना है।

ग्रॉस [gross] बनाम बेसिक पे: नया ESIC टेस्ट

यदि आप अभी भी पुराने ₹21,000 के ग्रॉस पे मानदंड के आधार पर ESIC पात्रता की गणना कर रहे हैं, तो हो सकता है कि आप:

  • कुछ कर्मचारियों के लिए आवश्यकता से अधिक अंशदान (Contribution) जमा कर रहे हों, या
  • उन कर्मचारियों को छोड़ रहे हों जिन्हें अनिवार्य रूप से कवर किया जाना चाहिए।

अब असली सवाल यह नहीं है कि “उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है?” बल्कि यह है कि “उनके वेतन का कौन सा हिस्सा कानूनी रूप से ‘मजदूरी’ (Wages) माना जाता है?”

1. भत्तों पर आधारित (Allowance-Heavy) सैलरी स्ट्रक्चर का अंत

पुरानी पद्धति: नियोक्ता अक्सर बेसिक पे (Basic Pay) को कम (30-40%) रखते थे और बाकी हिस्सा HRA, स्पेशल अलाउंस या कन्वेंस जैसे भत्तों में डाल देते थे। इससे “ESI ग्रॉस” को ₹21,000 से नीचे रखने में मदद मिलती थी।

नई वास्तविकता: धारा 2(88) के तहत, ‘मजदूरी’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है:

  • बेसिक पे (Basic Pay)
  • महंगाई भत्ता (DA)
  • रिटेनिंग अलाउंस (Retaining Allowance)

50% का नियम: यदि बाहर रखे गए भत्ते (HRA, कमीशन, यात्रा आदि) कुल पारिश्रमिक के 50% से अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त राशि को स्वचालित रूप से वेतन में वापस जोड़ दिया जाता है।

2. कुल वेतन के आधार पर अब ESIC पात्रता निर्धारित नहीं होती?

पुराना कानून: ₹24,000 ग्रॉस कमाने वाला कर्मचारी सीधे तौर पर “ESI से बाहर” माना जाता था।

2026 का कानून:

  • यदि बेसिक + DA = ₹10,000 (कुल CTC के 50% से कम) है, तो कानून इस स्ट्रक्चर को पुनर्गठित करता है।
  • एक बार भत्तों की छूट की सीमा 50% पर तय हो जाने के बाद, पुनर्गणना की गई “मजदूरी” ₹21,000 से नीचे आ सकती है।
  • परिणाम: अधिक ग्रॉस सैलरी होने के बावजूद, यह कर्मचारी अब अनिवार्य रूप से ESIC के दायरे में आ सकता है।

3. कम्प्लायंस चेकलिस्ट: FREE

ऑडिट के लिए तैयार रहने हेतु:

  • 50% विभाजन का ऑडिट करें: सुनिश्चित करें कि बेसिक + DA + रिटेनिंग अलाउंस = कुल पारिश्रमिक का कम से कम 50% हो।
  • छूट वाले हिस्सों की पहचान करें: HRA, ओवरटाइम और वैधानिक बोनस को अलग से सूचीबद्ध करें। याद रखें: छूट केवल 50% तक ही मान्य है।
  • पात्रता की पुनर्गणना करें: प्रत्येक कर्मचारी के वेतन (धारा 2(88) के अनुसार) की ₹21,000 की सीमा से तुलना करें। विशेष रूप से ₹20,000 से ₹30,000 के बीच कमाने वाले कर्मचारियों के लिए यह जांच अवश्य करें।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • ऑडिट का जोखिम: गलत वर्गीकरण के कारण जुर्माना और पिछले बकाया का भुगतान करना पड़ सकता है।
  • पे-रोल स्ट्रक्चरिंग: केवल भत्तों को बढ़ाकर अब नियोक्ता अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
  • भविष्य के अपडेट: संदिग्ध मामलों (जैसे प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन) पर ESIC स्पष्टीकरण जारी कर सकता है।