2026 में गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा: एग्रीगेटर्स (Aggregators) के लिए जरूरी जानकारी

2026 में, हमारे सामने से गुजरता कोई डिलीवरी पार्टनर या कैब ड्राइवर केवल एक सुविधा मात्र नहीं है, बल्कि वह भारतीय श्रम कानून में हुए एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है।

21 नवंबर, 2025 को ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security), 2020’ के देशभर में लागू होने के साथ ही, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Gig and Platform Workers) अब अनौपचारिक क्षेत्र से निकलकर एक व्यवस्थित सामाजिक सुरक्षा दायरे का हिस्सा बन गए हैं।

एक सीनियर लेबर लॉ कंसल्टेंट के रूप में, मैंने एग्रीगेटर्स को हमेशा एक ही सच बताया है:काम की लचीलापन (Flexibility), अब सुरक्षा के अभाव का बहाना नहीं बन सकती।

1. कानूनी पहचान: धारा 113 और 114

नए लेबर कोड ने ‘कर्मचारी बनाम ठेकेदार’ की पुरानी बहस को खत्म करते हुए दो नई श्रेणियां बनाई हैं:

  • गिग वर्कर्स (Gig Workers)
  • प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Platform Workers)

धारा 113 इन श्रमिकों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाती है। धारा 114 केंद्र सरकार को स्वास्थ्य, मातृत्व, दुर्घटना और वृद्धावस्था लाभ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं शुरू करने का अधिकार देती है, जो एक नए ढांचे के तहत ESIC जैसे लाभ प्रदान करेंगी।

2. एग्रीगेटर का अंशदान: टर्नओवर मॉडल

पारंपरिक ESIC (जहां नियोक्ता का हिस्सा 3.25% होता है) के विपरीत, गिग वर्कर्स के लाभों के लिए फंडिंग का तरीका अलग है:

  • अंशदान की दर: एग्रीगेटर्स को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1%-2% योगदान देना होगा।
  • अधिकतम सीमा: यह कुल योगदान गिग वर्कर्स को किए गए कुल भुगतान के 5% से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • उद्देश्य: यह राशि ‘नेशनल सोशल सिक्योरिटी फंड’ में जाती है, जिसका उपयोग श्रमिकों के जीवन/विकलांगता कवर [cover], स्वास्थ्य लाभ और सेवानिवृत्ति सुरक्षा के लिए किया जाता है।

3. पात्रता: 90 दिनों का नियम

लाभों का उपयोग करने के लिए, श्रमिकों को पिछले वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक उस प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े होना अनिवार्य है।

  • पंजीकरण: श्रमिकों को ‘ई-श्रम’ (e-Shram) पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा और आधार से जुड़ा UAN (Universal Account Number) प्राप्त करना होगा।
  • पोर्टेबिलिटी: इस UAN के जरिए श्रमिक अपनी सामाजिक सुरक्षा की जमा राशि खोए बिना एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर स्विच कर सकते हैं।

4. अनुपालन की चुनौतियाँ

हालांकि इरादा प्रगतिशील है, लेकिन इसे लागू करने में सटीकता की आवश्यकता है:

  • डेटा की शुद्धता [accuracy]: पात्रता की पुष्टि के लिए एग्रीगेटर्स को सत्यापित ‘एंगेजमेंट [सहभागिता] लॉग’ साझा करने होंगे।
  • लागत की योजना: टर्नओवर का 2% अंशदान एक सीधा अनुपालन खर्च है, जिसे अब 2026-27 के वित्तीय अनुमानों का हिस्सा बनाना होगा।
  • वेंडर [vendor] गवर्नेंस: थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक (Third Party Logistics) प्रदाताओं को भी इन नियमों का पालन करना होगा।

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अ. डिजिटल पहचान और ई-श्रम एकीकरण

  • सभी सक्रिय पार्टनर्स के लिए UAN मैपिंग।
  • केंद्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के साथ API [अप्लिकेशन प्रोग्रामिंग अंतरफलक] सिंक (Sync)।
  • प्रोफाइल ऑडिट: बैंक विवरण और नामित व्यक्ति (Nominee) की जानकारी।

ब. 90-दिवसीय नियम की ट्रैकिंग

  • छेड़छाड़-मुक्त (Tamper-proof) एंगेजमेंट लॉग।
  • 90-दिन की सीमा पर सिस्टम अलर्ट।
  • बजट अनुमान के लिए रिपोर्टिंग।

स. वित्तीय सटीकता

  • प्लेटफॉर्म-विशिष्ट टर्नओवर की गणना।
  • 1-2% अंशदान का मासिक संचय (Accrual)।
  • सीमा की जांच: अंशदान गिग वर्कर पेआउट के 5% से कम हो।
  • एग्रीगेटर पोर्टल पर त्रैमासिक (Quarterly) फाइलिंग।

द. वेंडर [vendor] और Third Party Logistics गवर्नेंस

  • वेंडर कर्मचारियों को UAN सिस्टम से जोड़ना।
  • अनुबंधों (Contracts) में क्षतिपूर्ति (Indemnity) क्लॉज को अपडेट करना।

Key4Comply की ओर से फ्री टिप: टर्नओवर पर आधारित 1%-2% अंशदान तकनीकी रूप से सामाजिक सुरक्षा कोष को दिया जाने वाला एक ‘शुल्क’ है। लेकिन यदि प्लेटफॉर्म श्रमिकों का पंजीकरण करने में विफल रहते हैं, तो अधिकारी उन्हें ‘पारंपरिक कर्मचारी’ के रूप में पुनर्वर्गीकृत कर सकते हैं, जिससे आप पर 12% PF + 3.25% ESIC की भारी देनदारी आ सकती है। इसलिए नियमों का पालन करना ही सबसे सस्ता विकल्प है।