संगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने एक अत्यंत मानवीय और कल्याणकारी कदम उठाया है। किसी विमित व्यक्ति (Insured Person) के निधन पर दी जाने वाली वैधानिक अंत्येष्टि सहायता राशि को पूर्व निर्धारित 15,000 रुपये की सीमा से बढ़ाकर अब 20,000 रुपये कर दिया गया है।
भारत के असाधारण राजपत्र (The Gazette of India Extraordinary) में अधिसूचना संख्या N-12011/1/2023-P&D के तहत यह निर्णय प्रकाशित किया गया है। यह संशोधन दुख की घड़ी में प्रभावित परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक संबल प्रदान करता है और साथ ही नई श्रम संहिताओं के अनुरूप नियमों में एकरूपता भी स्थापित करता है।
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यहाँ इस अधिसूचना की विधिक पृष्ठभूमि, इसके पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect), पात्रता के मानक और दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया का पूरा विवरण दिया गया है।
1. विधिक पृष्ठभूमि और कानूनी संदर्भ
यह अधिसूचना वर्तमान श्रमिक कल्याण व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत निर्मित हो रहे नए विधिक ढांचे के समन्वय से जारी की गई है।
राजपत्र में उल्लिखित मुख्य कानूनी प्रावधान
इस अधिसूचना में दो प्राथमिक वैधानिक प्रावधानों का संदर्भ लिया गया है:
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (2020 का अधिनियम संख्यांक 36) की धारा 32 की उपधारा (1) का खंड (च): यह प्रावधान व्यवस्था करता है कि मृत विमित व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए देय राशि का भुगतान परिवार के सबसे ज्येष्ठ जीवित सदस्य को अथवा उस व्यक्ति को किया जाए जिसने वास्तव में अंतिम संस्कार का व्यय वहन किया हो।
- सामाजिक सुरक्षा (केंद्रीय) नियमावली, 2026 का नियम 21: यह नियम निगम द्वारा प्रदत्त हितलाभों की वित्तीय सीमाओं और उनके क्रियान्वयन की कार्यप्रणाली को संचालित करता है।
इन वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए बीमा आयुक्त (योजना एवं विकास) उत्तम प्रकाश द्वारा अंत्येष्टि व्यय की राशि को आधिकारिक रूप से 20,000 रुपये निर्धारित किया गया है।
2. अधिसूचना के प्रमुख बिंदु
- आधिकारिक अधिसूचना संदर्भ: संख्या N-12011/1/2023-P&D
- राजपत्र प्रकाशन तिथि: 16 अक्टूबर 2026 (आदेश पर हस्ताक्षर: 7 अक्टूबर 2026)
- संशोधित सहायता राशि: 20,000 रुपये (बीस हजार रुपये मात्र)
- पूर्व सहायता राशि: 15,000 रुपये (पंद्रह हजार रुपये मात्र)
- प्रभावी तिथि: 8 मई 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू
3. पूर्वव्यापी प्रभाव: दावेदारों और नियोक्ताओं के लिए इसका महत्व
इस अधिसूचना का सबसे उल्लेखनीय पहलू इसका 8 मई 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू होना है। यद्यपि राजपत्र का प्रकाशन अक्टूबर 2026 में हुआ है, किंतु कानूनी दृष्टि से यह व्यवस्था मई माह से ही प्रभावी मानी जाएगी।
पूर्वव्यापी क्रियान्वयन के व्यावहारिक परिणाम
- 8 मई 2026 से मध्य-अक्टूबर 2026 के बीच स्वीकृत दावे: जिन विमित कर्मियों का निधन 8 मई 2026 को या उसके बाद हुआ और उनके आश्रितों को पूर्व दर के अनुसार 15,000 रुपये प्राप्त हुए हैं, वे सभी 5,000 रुपये की अंतर राशि प्राप्त करने के हकदार हैं। संबंधित ईएसआईसी शाखा कार्यालय से सत्यापन के बाद यह अंतर राशि प्राप्त की जा सकती है।
- वर्तमान में लंबित दावे: 8 मई 2026 के बाद हुए निधन के ऐसे सभी प्रकरण जो अभी प्रक्रियाधीन हैं, वे स्वतः ही 20,000 रुपये की बढ़ी हुई दर से स्वीकृत किए जाएँगे।
- 8 मई 2026 से पूर्व का निधन: यदि विमित व्यक्ति का निधन 7 मई 2026 को या उससे पहले हुआ हो, तो दावा चाहे किसी भी तारीख को प्रस्तुत किया गया हो, उस पर पूर्व निर्धारित 15,000 रुपये की सीमा ही लागू होगी।
4. अंत्येष्टि सहायता राशि प्राप्त करने की पात्रता
इस योजना का मूल उद्देश्य अंतिम संस्कार करने वाले व्यक्ति को तत्काल आर्थिक सहयोग देना है। इसके लिए पात्रता की शर्तें इस प्रकार हैं:
प्राथमिकता क्रम
- परिवार का सबसे ज्येष्ठ जीवित सदस्य: विमित व्यक्ति के निधन पर इस राशि की पहली पात्रता परिवार के सबसे बड़े जीवित सदस्य की होती है।
- वास्तविक व्यय करने वाला व्यक्ति: यदि मृतक का कोई जीवित परिजन न हो अथवा अंतिम संस्कार के समय परिवार का कोई सदस्य उपस्थित न हो सका हो, तो जिस किसी व्यक्ति ने वास्तव में अंतिम संस्कार संपन्न कराया हो और खर्च वहन किया हो, वह इस दावे के लिए पात्र माना जाता है।
अनिवार्य योग्यता शर्तें
- मृत्यु की तिथि पर संबंधित श्रमिक का ईएसआई योजना के अंतर्गत विमित व्यक्ति के रूप में पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- विमित व्यक्ति के खाते में ईएसआईसी नियमों के अनुसार मूल अंशदान की स्थिति दर्ज होनी चाहिए। अंत्येष्टि सहायता के लिए किसी लंबी सेवा अवधि की बाध्यता नहीं होती; यदि नियोक्ता ने नियमानुसार पंजीकरण और अंशदान की प्राथमिक औपचारिकताएं पूर्ण की हैं, तो यह लाभ मान्य होता है।
5. दावा प्रक्रिया एवं आवश्यक प्रलेख
इस बढ़ी हुई सहायता राशि को प्राप्त करने के लिए विधिक उत्तराधिकारी, ज्येष्ठ पारिवारिक सदस्य अथवा अंतिम संस्कार संपन्न करने वाले व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होता है।
आवश्यक दस्तावेज
- फॉर्म 22 (अंत्येष्टि व्यय दावा प्रपत्र): दावेदार द्वारा पूर्ण रूप से भरा और हस्ताक्षरित किया गया आवेदन।
- मृत्यु प्रमाण पत्र: नगर निगम, नगर पालिका, ग्राम पंचायत अथवा सक्षम चिकित्सालय द्वारा जारी मूल या सत्यापित प्रति।
- पहचान एवं संबंध का प्रमाण: दावेदार का आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र अथवा राशन कार्ड।
- बैंक विवरण: राशि का सीधा अंतरण (Direct Benefit Transfer) सुनिश्चित करने के लिए रद्द चेक (Cancelled Cheque) या बैंक पासबुक की प्रति, जिसमें नाम, खाता संख्या और आईएफएससी (IFSC) कोड स्पष्ट अंकित हो।
- नियोक्ता या स्थानीय प्राधिकारी का प्रमाणन: यदि परिवार से इतर किसी व्यक्ति ने अंतिम संस्कार किया हो, तो वास्तविक व्यय किए जाने के संबंध में आवश्यक घोषणा पत्र अथवा स्थानीय अधिकारी का प्रमाण पत्र।
चरणबद्ध प्रक्रिया
- सूचना प्रेषण: श्रमिक के निधन के उपरांत परिजनों द्वारा नियोक्ता और निकटतम ईएसआईसी शाखा कार्यालय को अविलंब सूचित किया जाना चाहिए।
- नियोक्ता द्वारा सत्यापन: त्वरित निस्तारण के लिए फॉर्म 22 पर मूल नियोक्ता के हस्ताक्षर और मुहर द्वारा प्रमाणीकरण करा लेना हितकर रहता है।
- शाखा कार्यालय द्वारा जांच: शाखा प्रबंधक पहचान पत्र और ऑनलाइन पोर्टल के आधार पर विमित स्थिति की जांच और सत्यापन करते हैं।
- सीधा बैंक अंतरण: दावा स्वीकृत होते ही 20,000 रुपये की राशि एनईएफटी (NEFT) या आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से सीधे दावेदार के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।
6. मानव संसाधन (HR) और अनुपालन अधिकारियों के लिए दिशा-निर्देश
प्रतिष्ठानों के मानव संसाधन प्रबंधकों, पेरोल प्रभारियों और श्रम कानून सलाहकारों को इस अधिसूचना के आलोक में निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
- आंतरिक नियमावली का अद्यतनीकरण: संस्था की वैधानिक अनुपालन पुस्तिकाओं, कर्मचारी मार्गदर्शिकाओं और कल्याण योजनाओं में अंत्येष्टि सहायता की सीमा को संशोधित कर 20,000 रुपये दर्ज करें।
- 8 मई 2026 के बाद के मामलों की समीक्षा: 8 मई 2026 के उपरांत दिवंगत हुए कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों की समीक्षा करें और उनके परिवारों को 5,000 रुपये की बकाया अंतर राशि प्राप्त करने में सहयोग दें।
- कार्यस्थल पर जागरूकता: उत्पादन इकाइयों और कार्यस्थलों पर कल्याण समितियों को इस संशोधन से अवगत कराएं, ताकि संकट के समय किसी भी श्रमिक के परिवार को बिना किसी विलंब के सही मार्गदर्शन मिल सके।
निष्कर्ष
ईएसआईसी द्वारा अंत्येष्टि व्यय सहायता राशि को बढ़ाकर 20,000 रुपये किया जाना जीवन-यापन की बढ़ती लागत के अनुरूप एक अत्यंत सामयिक और स्वागतयोग्य निर्णय है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत लाभों को आधुनिक और व्यावहारिक बनाने की दिशा में यह एक ठोस कदम है। इसे 8 मई 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव देकर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि बीते कुछ महीनों में प्रभावित हुए परिवारों को भी इस संवर्धित वित्तीय सुरक्षा का पूरा लाभ मिले।
सभी नियोक्ताओं और अनुपालन अधिकारियों को इस नियम की जानकारी को प्रसारित करना चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार सहजता से मिल सके।
विधिक अस्वीकरण (Legal Disclaimer): यह आलेख केवल सामान्य जानकारी, शैक्षणिक अध्ययन और अनुपालन मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे किसी प्रकार की औपचारिक विधिक सलाह, वैधानिक प्रमाणन अथवा प्रशासनिक निर्णय के रूप में न देखा जाए। यद्यपि इसे 7 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना संख्या N-12011/1/2023-P&D (राजपत्र प्रकाशन 16 अक्टूबर 2026) के आधार पर पूर्णतः प्रामाणिक और सटीक रखने का प्रयास किया गया है, तथापि नियमों की आधिकारिक विधिक व्याख्या का अनन्य अधिकार कर्मचारी राज्य बीमा निगम, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा सक्षम न्यायालयों के पास ही सुरक्षित है। किसी विशिष्ट दावे अथवा विवाद के समाधान हेतु पाठकों को अधिकृत श्रम विधि विशेषज्ञ अथवा अपने क्षेत्रीय ईएसआईसी शाखा कार्यालय से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।
