कॉन्ट्रैक्ट और अस्थाई कर्मचारियों को अब मिलेगा ESIC का लाभ: 2026 में स्टाफिंग एजेंसियों के लिए नए नियम

साल 2026 में, भारत के ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता’ (Code on Social Security, 2020) के आने से ‘स्थाई’ और ‘कंत्राटी’ (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों के बीच का पुराना अंतर अब खत्म हो गया है। दशकों से, स्टाफिंग एजेंसियां और मुख्य नियोक्ता (Principal Employers) नियमों की जिम्मेदारी से बचने के लिए ठेका मजदूरों का सहारा लेते थे। लेकिन 2025 के अंत में ‘नए लेबर कोड’ के पूरी तरह लागू होने के साथ ही, यह सुरक्षित रास्ता अब बंद हो चुका है।

एक सीनियर लेबर लॉ कंसल्टेंट होने के नाते, मैं देख रहा हूँ कि कई एजेंसियां अभी भी ESIC कैलकुलेशन के पुराने तरीकों को अपना रही हैं, जिससे वे खुद को और अपने ग्राहकों को जोखिम में डाल रही हैं। 2026 में स्टाफिंग एजेंसियों को खुद में क्या बदलाव लाने की जरूरत है, यहाँ विस्तार से बताया गया है:

1. “कॉन्ट्रैक्टर शील्ड” का अंत

पुराने ‘संविदा श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970’ के तहत, सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी अक्सर ठेकेदारों और मुख्य नियोक्ताओं के बीच झूलती रहती थी।

  • मुख्य बदलाव: ‘OSH कोड 2020’ और ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020’ के तहत, स्टाफिंग एजेंसियों को अब स्पष्ट रूप से ‘नियोक्ता’ (Employer) माना गया है।
  • मुख्य नियोक्ता की जिम्मेदारी: यदि एजेंसी नियमों का पालन करने में चूक करती है, तो मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) ही अंतिम रूप से जिम्मेदार होगा।
  • ESIC का दायरा: यदि किसी अस्थाई कर्मचारी का ‘वेतन’ (धारा 2(88) और 50% नियम के अनुसार) ₹21,000 से कम है, तो ESIC अनिवार्य है (बशर्ते संस्थान कर्मचारी सीमा की शर्त पूरी करता हो)।

2. 50% का नियम और अस्थाई सैलरी स्ट्रक्चर

स्टाफिंग एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती वेतन (Wage) की नई परिभाषा है।

  • धारा 2(88) के अनुसार, ‘वेतन’ का मतलब है: मूल वेतन (Basic Pay) + महंगाई भत्ता (DA) + रिटेनिंग अलाउंस।
  • अन्य भत्ते (HRA, कन्वेंस, स्पेशल अलाउंस आदि) कुल वेतन के केवल 50% तक ही छूट के दायरे में रखे जा सकते हैं।
  • नियम की सच्चाई: यदि भत्ते 50% से अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त राशि को बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा।

उदाहरण:

  • कुल वेतन (Gross Salary) = ₹22,000
  • बेसिक + DA = ₹8,000
  • भत्ते = ₹14,000
  • CTC का 50% = ₹11,000 (यहाँ भत्ते सीमा से ₹3,000 ज्यादा हैं)
  • संशोधित बेसिक + DA = ₹8,000 + ₹3,000 = ₹11,000
  • चूंकि ₹11,000, ₹21,000 से कम है → इसलिए ESIC लागू होगा

3. फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट (FTE): नया मानक

लेबर कोड ने ‘फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट’ (FTE) को औपचारिक रूप दे दिया है, जिससे एजेंसियों को स्पष्टता मिली है:

  • FTE कर्मचारी पहले दिन से ही सभी वैधानिक लाभों (ESIC और ग्रेच्युटी सहित) के हकदार हैं।
  • इसके लिए कोई ‘वेटिंग पीरियड’ नहीं है, कॉन्ट्रैक्ट की अवधि चाहे कितनी भी छोटी हो, ESIC से मना नहीं किया जा सकता।
  • इससे यह सुनिश्चित होता है कि अस्थाई कर्मचारियों को भी स्थाई कर्मचारियों की तरह ही सामाजिक सुरक्षा मिले।

4. स्टाफिंग एजेंसियों के लिए ‘कम्प्लायंस चेकलिस्ट’

2026 में ऑडिट के लिए तैयार रहने हेतु एजेंसियों को ये कदम उठाने चाहिए:

  • भत्तों का ऑडिट करें: सुनिश्चित करें कि छूट वाले हिस्से (HRA, यात्रा आदि) 50% की सीमा को पार न करें।
  • ESIC रजिस्ट्रेशन: पुष्टि करें कि हर कर्मचारी के पास आधार से जुड़ा ESIC इंश्योरेंस नंबर हो ताकि वह कहीं भी काम आने योग्य (Portable) हो।
  • ग्राहकों के साथ पारदर्शिता: मुख्य नियोक्ताओं को हर महीने ‘कम्प्लायंस सर्टिफिकेट’ जारी करें, जिससे यह साबित हो सके कि गणना किए गए नए वेतन आधार पर ESIC जमा किया गया है।