भारत के श्रम कानून ढांचे में एकरूपता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 जनवरी 2026 को एक अधिसूचना जारी की है। इसके तहत ‘वेतन संहिता (Code on Wages), 2019’ में ‘श्रमिक’ (Worker) की परिभाषा के दायरे में आने वाले पर्यवेक्षकीय (Supervisory) कर्मचारियों की वेतन सीमा में संशोधन किया गया है।
क्या बदलाव हुआ?
इससे पहले, विभिन्न श्रम संहिताओं में पर्यवेक्षकीय कर्मचारियों की वेतन सीमा को लेकर विसंगति थी:
| श्रम संहिता | पर्यवेक्षकीय भूमिका के लिए वेतन सीमा |
|---|---|
| वेतन संहिता, 2019 | ₹15,000/माह |
| IR कोड और OSH कोड | ₹18,000/माह |
इस भ्रम को दूर करने के लिए, केंद्र सरकार ने अब ‘वेतन संहिता’ के तहत भी इस सीमा को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह कर दिया है।
आधिकारिक अधिसूचना की मुख्य बातें
- तारीख: 30 जनवरी 2026
- अधिसूचना संख्या: S.O. 454(E)
- प्राधिकरण: वेतन संहिता, 2019 की धारा 2(z)(d)
- मुख्य प्रावधान: कोई भी व्यक्ति जो पर्यवेक्षकीय (Supervisory) क्षमता में कार्यरत है और ₹18,000 प्रति माह से अधिक वेतन ले रहा है, उसे वेतन संहिता के तहत ‘श्रमिक’ की परिभाषा से बाहर रखा जाएगा।
‘पर्यवेक्षकीय कर्मचारी’ (Supervisory Employee) कौन है?
‘पर्यवेक्षकीय क्षमता’ शब्द को संहिता में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। इसकी व्याख्या केवल जॉब टाइटल (पद) के आधार पर नहीं, बल्कि न्यायिक मिसालों और कार्यात्मक परीक्षणों (Functional Tests) के आधार पर की जाती है।
कार्य के स्वरूप के संकेतक:
- अधीनस्थों (Subordinates) के काम की निगरानी करना।
- कार्य सौंपना और कार्य प्रदर्शन की निगरानी करना।
- छुट्टी, अनुशासन या कार्य प्रदर्शन मूल्यांकन (Appraisal) की सिफारिश या अनुमोदन करना।
- मुख्य प्रबंधकीय शक्तियां न होने के बावजूद स्वतंत्र निर्णय लेना।
अदालतें, पदनाम (Designation) के बजाय कर्तव्यों की वास्तविक प्रकृति का आकलन करती हैं। उदाहरण के लिए, यदि ₹19,000/माह कमाने वाले ‘टीम लीड’ की भूमिका वास्तव में पर्यवेक्षकीय है, तो उन्हें ‘श्रमिक’ की श्रेणी से बाहर रखा जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- कानूनी वर्गीकरण: यह तय करता है कि कर्मचारी वेतन संबंधी सुरक्षा, विवाद समाधान मंच और यूनियन अधिकारों के लिए पात्र है या नहीं।
- अनुपालन (Compliance) पर प्रभाव: नियोक्ताओं को सही वर्गीकरण सुनिश्चित करने के लिए नौकरियों की भूमिका और वेतन संरचना का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए।
- HR परामर्श: ₹18,000 की सीमा के अनुसार रोजगार अनुबंध, HR मैनुअल और पे-रोल सिस्टम को अपडेट करें।
नियोक्ताओं को क्या करना चाहिए?
- पर्यवेक्षकीय भूमिकाओं और वेतन स्तरों का ऑडिट करें।
- उन कर्मचारियों का पुनर्वर्गीकरण करें जो अब ‘श्रमिक’ की परिभाषा से बाहर आते हैं।
- PoSH, वेतन और IR (औद्योगिक संबंध) से संबंधित दस्तावेजों को तदनुसार अपडेट करें।
- HR टीमों को पदनाम के बजाय कार्य-आधारित वर्गीकरण के लिए प्रशिक्षित करें।
निष्कर्षयह अधिसूचना भारत के श्रम कानूनों में एकरूपता की दिशा में एक निर्णायक कदम है। नियोक्ताओं को अब वेतन संहिता के तहत पर्यवेक्षकीय भूमिकाओं के लिए ₹18,000/ माह को ही मानक वेतन सीमा मानना चाहिए। कानूनी वर्गीकरण पद-आधारित नहीं, बल्कि कार्य-आधारित होना चाहिए और HR टीमों को अपनी नीतियों और रिकॉर्ड को इसके अनुरूप जल्द से जल्द बदलना चाहिए।
अस्वीकरण : इस ब्लॉग में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। यह सामग्री 2026 के भारतीय श्रम कानूनों (Labour Codes) के ढांचे पर आधारित है। इसे पेशेवर कानूनी सलाह (Legal Advice) न माना जाए। श्रम कानून, सरकारी अधिसूचनाएं और राज्यों के नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। अपने संस्थान में किसी भी वेतन संरचना (Salary Structure) या नीतियों को लागू करने से पहले कृपया ‘Key4Comply‘ के कानूनी विशेषज्ञों या योग्य लेबर लॉ कंसल्टेंट से परामर्श अवश्य लें। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के परिणामों के लिए लेखक या संस्था उत्तरदायी नहीं होगी।
